हर तरह जा’दू और जिन्न के असर को खत्म कर देगा ये वजीफ़ा,कुरान ऐ करीम में…

जो जादू की बी’मारी में हो तो वो उस का ईलाज जा’दू से ना करे क्योंकि शर बुराई के साथ ख़त्म नहीं होती,और ना कुफ़्र कुफ़्र के साथ ख़त्म होता है, बल्कि शर और बुराई ख़ैर और भलाई से ख़’त्म होती है।तो इसी लिए जब अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम से जादू के ख़ातमा के लिए मंत्र वग़ैरा पढ़ने के मुताल्लिक़ पूछा गया तो आपने फ़रमाया (ये शैता’नी अमल है) और हदीस में जिस जादू का ज़िक्र किया गया है वो जा’दू वाले मरी’ज़ से जा’दू के ज़रीये ख़’त्म करने को कहते हैं।

लेकिन अगर ये ईलाज क़ुरआन-ए-करीम और जायज़ दवाओं और शरई और अच्छे दम के साथ किया जाये तो इस में कोई हर्ज नहीं,और अगर जादू से हो तो ये जायज़ नहीं, जैसा कि ज़िक्र किया गया है,क्योंकि जादू शैतानों की इबादत है। तो जादूगर उस वक़्त तक जादू ना तो कर सकता है और ना ही उसे सीख सकता है जब तक वो उनकी इबादत ना करे और शै’तानों की ख़िदमत ना कर ले, और उन चीज़ों के साथ उनका तक़र्रुब हासिल ना करले जो वो चाहते हैं तो इसके बाद उसे वो इश्याय सिखाते हैं जिससे जादू होता है।

कुरान

लेकिन अल्हम्दुलिल्ला इस में कोई हर्ज नहीं कि जादू किए गए शख़्स का ईलाज क़ुरआन और शरई तावीज़ात (यानी शरई दम वग़ैरा जिनमें पनाह का ज़िक्र है) और जायज़ दवाओं के साथ किया जाये जिस तरह कि डाक्टर दूसरे अमराज़ के मरीज़ों का ईलाज करते हैं तो इस से ये लाज़िम नहीं कि शिफ़ा लाज़िमी मिले क्योंकि हर मरीज़ को शिफ़ा नहीं मिलती।

अगर मरीज़ की मौत ना आई हो तो इस का ईलाज होता है और उसे शिफ़ा नसीब होती है।और बाज़-औक़ात वो इसी मर्ज़ में फ़ौत हो जाता है अगरचे उसे किसी माहिर से माहिर और किसी सपीशलीसट डाक्टर के पास ही क्यों ना ले जाएं तो जब मौत आचुकी हो ना तो ईलाज काम आता है और ना ही दवा किसी काम आती है।

पवित्र कुरान

फ़रमान रब्बानी-“और जब किसी का वक़्त मुक़र्ररा आ जाता है तो उसे अल्लाह-तआला हरगिज़ मोहलत नहीं देता” दवा और ईलाज तो उस वक़्त काम आता है जब मौत ना आई हो और अल्लाह तआला ने बंदे के मुक़द्दर में शिफ़ा की हो तो ऐसे हो ये जिसे जादू किया गया है बाज़-औक़ात अल्लाह तआला ने इस के लिए शिफ़ा लिखी होती है और बाज़ औक़ात नहीं लिखी होती.

ताकि उसे आज़माऐ और इस का इमतिहान ले और बाज़ औक़ात किसी और सबब की बिना पर जिसे अल्लाह अज़्ज़-ओ-जल जानता है,हो सकता है जिसने उस का ईलाज क्या हो उसके पास इस बीमारी का मुनासिब ईलाज ना हो।नबी सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम से सही तौर पर ये साबित है का आप सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया।(हर बीमारी की दवा है तो अगर बीमारी की दवा सही मिल जाये तो अल्लाह तआला के हुक्म से इस बीमारी से नजात मिल जाती है।)

और जादू के शरई ईलाज में से ये भी है कि इस का ईलाज क़ुरआन पढ़ कर किया जाये।जादू वाले मरीज़ पर क़ुरआन की सबसे अज़ीम सूरत फ़ातिहा बार-बार पढ़ी जाये। तो अगर पढ़ने वाला सालिह और मोमिन और जानता हो कि हर चीज़ अल्लाह तआला के फ़ैसले और तक़दीर से होती है,और अल्लाह सब मुआमलात को चलाने वाला है और जब वो किसी चीज़ को कहता है कि हो जा तो हो जाती है तो अगर ये ईमान तक़्वे और इख़लास के साथ पढ़ी जाये और क़ारी उसे बार-बार पढ़े तो जादू ज़ाइल हो जाएगा और मरीज़ अल्लाह तआला के हुक्म से शिफ़ायाब होगा।

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