आज की ये पस्ट उन सभी भाई बहनो के लिये है,जो कर्ज मे डुबे होने की वजह से बेहद परेशान है,हाजार कुशीश करने के बावजुद भी कर्ज से छुटकारा नही पा रहे है,
तो उन सभी भाई बहनो से मेरा गुजारीश है ईस पस्ट को जरुर देखे ईंशा आल्लाह ईस पस्ट मे आपको आपकी परेशानी दुर होने की,सबसे आसान और बेहतरीन तरीका मिल जायेगा।
तो उन सभी भाई बहनो से मेरा गुजारीश है ईस पस्ट को जरुर देखे ईंशा आल्लाह ईस पस्ट मे आपको आपकी परेशानी दुर होने की,सबसे आसान और बेहतरीन तरीका मिल जायेगा।
क्योकि आज की ईस पस्ट मे हम सब जानेंगे,
हजरत आबु साईद खुदरी र.आ से रिवायत है की,एक दिन हुजुर ﷺ मसजिद पर तशरीफ लाये,वहा आपने एक आनसारीशख्स को देखा,जिनका नाम हजरत आबु उमामा रा.अ था।
आप ﷺ ने पुछा,आए आबु उमामा क्या बात है, मे तुम्हे ऐसे वक्त मे मसजिद मे देख रहा हु, जबकि नमाज का वक्त नही है,
तो हजरत आबु उमामा रा.अ ने कहा या रसुल उल्लाह ﷺ मे बहुत परेशानी मे हु, मुजे गम और कर्ज ने गैर रखा है।
आप ﷺ ने पुछा,आए आबु उमामा क्या बात है, मे तुम्हे ऐसे वक्त मे मसजिद मे देख रहा हु, जबकि नमाज का वक्त नही है,
तो हजरत आबु उमामा रा.अ ने कहा या रसुल उल्लाह ﷺ मे बहुत परेशानी मे हु, मुजे गम और कर्ज ने गैर रखा है।
आप ﷺ ने फरमाया क्या तुम्हे ऐसे कलिमात ना सिखाउँ, जिनको आगर तुम करो तो आल्लाह सुबहान होतआला तुम्हारी तमाम गम व फिकर दुर फरमा देगा,और तुम्हारे तमाम कर्ज अदा हो जायेगा,
तो हजरत आबु उमामा रा.अ ने कहा, क्यो नही बताईये जरुर।
आप ﷺ ने फरमाया: सुबह और शाम के वक्त ये दुआ पढ़ा करो
आप ﷺ ने फरमाया: सुबह और शाम के वक्त ये दुआ पढ़ा करो
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ الدَّيْنِ، وَقَهْرِ الرِّجَالِ،
आल्लाहुम्मा ईन्नि आओजुबिका मिनाल हाम्मि वाल हाजनि,उआओजुबिका मिनाल आझजि,वाल कासली,उआओजुबिका मिनाल जुबनी वाल बुखलि,उआओजुबिका मिन गाला बातिद दाईनी वाल काहरी रिजाला
तर्जुमा
या आल्लाह मे रंज और गम से तेरा पनाह मांगता हु,मे आजिजी और सुस्ती से तेरी पनाह मांगता हु। मे बुजदीली और कंजुसी से तेरा पनाह मांगता हु, मे कर्ज की बुज से और लोगो की कहर से तेरी पनाह मांगता हु।
या आल्लाह मे रंज और गम से तेरा पनाह मांगता हु,मे आजिजी और सुस्ती से तेरी पनाह मांगता हु। मे बुजदीली और कंजुसी से तेरा पनाह मांगता हु, मे कर्ज की बुज से और लोगो की कहर से तेरी पनाह मांगता हु।
हजरत आबु उमामा रा.अ फरमाते है:
की जब मेने ईस पर आमल किया तो आल्लाह तआला ने मेरी तमाम फिकर दुर फरमा दी,और सारा कर्ज अदा करवा दिया
-(Sunan Abu Dawud, : 1542)
(सुन्नन आबु दाउद -1542)
(सुन्नन आबु दाउद -1542)

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