अजान की शुरुवात कहा से और कैसे हुई
एक बार हर मुसलिम जरुर पड़े और पड़कर शैयर भी करदे।।
शुरु शुरु मे मक्का मे बहुत ही कम लोगौ ने ईसलाम आपनाये थे। और जो लोग मुसलमान बने थे उनलोगौ के जान पे हर वक्त खतरा रहता था।। जमात के सात नमाज अदा करने के लिये एक दुसरे बुला लिया करते थे।। लेकिन नमाज के लिये बुलाने का कोई आगाज करने का तरिका नही था।।
कुछ दिन बाद हूजुर पाक सल्लाल्लहु अलैही न सल्लाम मक्का से मदीना हिजरत करके तशरीफ ले गये और वहा मस्जिदे कुफा के बाद नमाज अदा करने के लिये मस्जिदे नबवी तामिर की गयी। 2 साल के बाद मुसलमानौ की तादाद बड़ने लगी और जमात की नमाज के लिये जोर से पुकारा जाता था।। और जो सुनता था वो आकर जमात की नमाज मे शामिल हो जाता था। लेकिन आब मुसलमानौ को नमाज के लिये बुलाने का कोई तरिका ढुंढना हूजुर पाक (स.अ) और उनके साहाबियों को जरुरी महसुस होने लग रहा था।। हूजुर पाक (स.अ) ने तमाम साहाबियों के साथ ईसलाह और मशवारा शुरु किया।। तो किसि ने घन्टा बजाने की पेशकश की तो किसि ने मोमबत्ती जलाकर नमाज के लिये बुलाने की पेशकश की।।
लेकिन हूजुर ए पाक (स.अ) को किसि के भी पेशकश दिलकश नही लगी और उन्हे ईत्मिनान नही हुवा।। और बेहतर अच्छी सिफारिश के लिये राह देखने लगी ईस उम्मिद पे के ईसपर आल्लाह की तरफ से कोई आच्छा तरीका या सुजाव का कोई हुक्म आजाये।। और उसके लिये ईंतजार करने लगे।।
कुछ दिनों के बाद एक दिन आब्दुल्ला ईब्ने जैद सहाबी मुहम्मद (स.अ) के पास आये और कहने लगे आल्लाह के नबी। मैने कल एक खुबसुरत ख्वाब देखा, हूजुर पाक (स.अ) ने पुछा कैसा ख्वाब देखा..?
तो अब्दुल्लाह ईब्ने जैद ने दवाब दिया "मैने एक शख्स को ख्वाब मे देखा जो मुजे अजान के अल्फाज सिखा रहा था, और फिर उसने मशवारा दिया के ईसि अल्फाजौ से लोगौ को नमाजों के लिये बुलाया करो।। और उन्हौने हूजुर पाक (स.अ) को अजान के वो आल्फाज सुनाये जो उन्होंने ख्वाब मे सिखा था।।
हूजुर ए पाक (स.अ) को अजान के वो अल्फाज का अंदाज और मतलब बहुत खोबसुरत लगा और आब्दुल्ला ईब्ने जैद के ख्वाब को सच माना और उसको तस्लीम कर लिया।। और अब्दुल्ला ईब्ने जैद को "अजान के ये अल्फाज" बिलाल को सिखाने को कहा।।
ईसके बाद नमाज का वक्त होते ही जब बिलाल खड़े हुवे और नमाज के लिये अजान दी।। बिलाल की अजान की आवाज से सारे मदिना शरीफ गूंज उठी और लोग अजान सुनकर मस्जिदे नबवी की तरफ तेज रफ्तार से दौड़ते चले आने लगे।। उमर ईब्न खत्ताब भी आ गये और उन्हौने हूदुर ए पाक (स.अ) से कहा ! मुजे भी यही आजान एक शख्स ने कल रात ख्वाब मे आके सिखाया था।। ये सुनकर हूजुर ए पाक (स.अ) को ईत्मीनान हुवा और ईस आजान को नमाज के लिये बुलाने और पुकारने के लिये हमेशा के लिये मुहर लगा दिया।। यानी हमेशा के लिये Full And Final कर दिया।।
☆☆सुब्हानअल्लाह☆☆
Reference
[बुखारी शरीफ book 1 volume 11 हदीस नम्बर 577, 578, 579, 580,]
दोस्तौ बहुत मेहनत से ढुंडकर आपलोगौ के लिये लाता हु।।
फिर एक पस्ट लिखने मे धंटौ तक लग जाता है।।
आपलोग खोद पड़ने के बाद शेयर कर दिजियेगा ताकि दिनी जानकारिया हर मुसलमानौ तक पहुच सके।।
कोई भाई मेरे पस्ट को कपि करो तो सात मे ब्लग लिंक जरुर पस्ट करे।।
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