ये वोह पहाड़ है जहा पर कुरआन शरीफ नाजिल हुवा था।
आब सवाल कुरआन शरीफ तो हुजुर ए पाक सल्लल्लाहू आलैही असल्लाम पर नाजिल हुवा था तो पहाड़ पर कैसे।
मतलब ईस पहाड़ी पर एक गुफा है जिसके नाम है गार ए हीरा।
हूुर ए पाक (स.अ) उसी गुफा बैटकर एकाग्रता से कुल काऐनात के मालिक को याद करता था। एक दीन उसी तरह ईस दुनीया के मालिक को याद कर रहा था। तब एक फरिश्ता आये और कहने लगे पड़ो। "ईकरा बिसमी रब्बिकाल्लाजि खलक।" ये पहला दीन था कुरआन पाक का एक सुरह नजील हुवा। ईसिलिये सन्किप्त मे कहा गया ईसि पहाड़ पर कुरान नजील हुवा।।
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