एक बार पुरा जरुर पड़े (वसीयत और नसीहत एक बाप का सभी मुसलमान बैटौ के लीये)।।
एक शहर मे एक दौलत मंद ईनसान था। उन्हौने आपने बैटे को वसीयत करते हुवे कहा, बैटा मेरे मरने के बाद मेरे मे मेरे ये फटे हुवे मोजे (शॉक्स) पेहना देना। मेरा ये आखरी ख्वाहिश जरुर पुरी करना।।
बाप के ईन्तेकाल होते ही गुस्ल देने के बाद बेटे ने बाप की आखरी ख्वाहिश बताई, आलिम ने कहा हमारे दीन मे सिर्फ कफन पहनाने की ईजाजत है, पर बेटे की जिद थी के मेरे बाप की आखरी ख्वाहिश पुरी हो, बहस आब ईतनी बड़ गयी की शहर की उलमाऔ को जमा किया गया पर सब उलमा एक सात होकर भी ईस बारे मे कोई नतिजा निकल नही पाया।।
सभी लोग परेशान हो गये आब कैसे किया क्या जाये, ईसी माहोल मे से एक शक्स आगे बड़ कर आये और आकर बेटे के हात मे बाप का लिखा हुवा खत दिया जिस मे बाप की नसीहत लिखी थी "मेरे प्यारे बेटे" देख रहे हो ? बेशुमार माल और दौलत,बंगलो,गाडी और बड़ी बड़ी फैक्ट्री और फार्म हाउस के मेरे पास ईतना सबकुछ होने के बाद भी मे एक फटा हुवा मुजा तक नही ले जा सकता, एक रोज तुम्हे भी मौत आएगी, आगाह हो जाओ तुम्हे भी एक कफन मे ही जाना पड़ेगा, लेहाजा कोशिश करना दौलत का सही ईस्तेमाल करना, नेक राह पर खर्च करना, बेसहाराओ का सहारा बनना क्योकि कब्र मे सिर्फ तुम्हारे आमल ही जाएंगे" और ये नसीहत बाकी ईस दुनीया की सभी मुसलमान बेटौ तक पहुंचा देना।।
नोट: आप सभी से दरख्वास्त है की कड़वा सच जरुर शेयर करे, क्या मालुम किसी एक को तौफिक हासिल हो जाये, और यही एक शेयर हम सब का मागफिरत का जरिया बन जाये।।
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