या आल्लाह अगर मेरी रोजि आसमान मे है,
तो नाजिल फरमा।। जमिन के अन्दर हो तो,
जाहिर फरमा।। अगर दुर है तो करिब करदे,
अगर करिब हो तो मुजे अता फरमा।। अगर
मुजे दे चुका है तो ईसमे बरकत अ ईनायत अता
फरमा।। और जो ये दुवा पड़ रहा है सब के हक मे
अपने रहमत से रिज्क मे बरकते अता फरमा।।
आमिन सुम्मा आमिन।।
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