हजरत उमर (र.आ)की वफात का वकिया
एक बार एक मजुसी गैर मुस्लिम आबु लुलु फिरौज एक दिन हजरत उमर (र.अ) के पास आये। आपने मालिक की शिकायत लेकर।उसके मालिक उसके उपर टेक्स लगा रहा था। हजरत उमर(र.आ) ने तहकीक लगाई के कैसि टेक्स..!
तहकीक पुरा होने के बाद हजरत उमर (र.अ)ने आबु लुलु फिरौज को कहा के टेक्स हक्की की लगी है ना हक्की नही।
तब वो गुस्ताख गुस्सा होकर चला गया। और दुसरा दीन सुबह को फज्र के वक्त जब हजरत नमाज पड़ने लगे तब उस गुस्ताख ने हजरत उमर (र.अ) के 6 बार वार पे वार किया। आप बेहुशी के हालात मे हो गये थे। आप ने फरमाया के मुजे कोने मे रखा जाये और पेहले नमाज पुरी की जाये। जब सबने नमाज आदा कर लीये तब आपने पुछा की किसने मुजे मारा तो किसिने जवाब दिया के किसि मजुसी ने आप पर वार किया। तो हजरत उमर (र.आ) के तेहरे पर रौनक आगये। और हात उटाकर आल्लाह का शुक्र अदा किया की किसि मुसलमान ने वार नही किया।फिर आप तिन दिन तक जख्मि हालात मे रहे। फिर 23 ए.ह मे वाफात कर गये।। वफात के वक्त आप (र.अ) की उमर 63 साल थी।। आप (र.अ) ने 10 साल, 6 महीना 4 दीन हुकुमत किया।। और आप 3 दिन जखमौ की हालात मे रहे।।
दोस्तौ बहुत मेहनत करके लिखकर आप सब की खिदमत पे पेश कर रहा हु।। ताकी दीनी बात हर मुमिन मुसलमान तक पहुंच सके। आप सब खुद पड़कर आगे शेयर कर दिजियेगा।।
मुजे हिन्दी पुरी तरह से लिखना नही आता आगर कही कोई गलती नदर आसे तो कमेन्ट पर बतायीयेगा जरुर।।
Collected From Islamic Books
Blog Writter: Abdullah Ahmed
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