उमर एक बार पैगम्बर के कत्ल के इरादे से निकले थे।
ये कहानी उस वक्त की है जब मक्का मे गरमी तेज हो रही थी। सख्त दोप मे एक शख्स जिसका नाम उमर-ईब्न-आल-खत्ताब था। सीने मे बदले की आग लिये हुवे आपने मकसद की तामिल की खातिर।। शदीद गरमी की परवाह किये बगैर तैज रफ्तार से चल रहे थे।उनके सामने एक ही मकसद था, किसि भी तरह ईनसानीयत की पाट पड़ाने वाले शख्स "हदरत मुहम्मद (स.अ) को मौत की नीन्द सुला देना (नाउजु बिल्लाह)।।
पर उस ऩौजवान को क्या मालुम था के सुबह को आकाये नामदार हजरत मुहम्मद मुस्तफा (स.अ) की दुवा "आऐ आल्लाह ईसलाम को आबुजहल बिन हिशाम या उमर बिन खत्ताब के जरिये फैला दे (तिरमिजि) आसमानौ को चिरती हुई आर्श तक पहुंच चुकि है और दुवा भी आल्लाह ने कबुल कर लीये, आखिर जिसके खातिर ये दुनीया बनाया उसीने दुवा की है। आल्लाह ने फौरान वह दुवा कबुल कर लिया।। ऱास्ते मे एक शख्स ने हजरत उमर से पुछा उमर ईतनी दुप पर कहा जा रहे हो।। उमर की जवाब मुहम्मद को खत्म करने। उस शख्स ने कहा पेहले आपने बहन और जिजा री खबर लो वह भी मुसलमान बन गये। यह सुनते ही उमर आग बबुला होकर बहन के घर गये उस वक्त उनके बहन तिलावत पर थे। उमर ने आपने कानौ से खुद तिलावत करते हुवे सुनकर घर के आन्दर दाखिल हुवे।। उसके बहन ने कुरआन चुपा लिया उमर ने पुछा किया पड़ रहे थै..? तो बहन ने कहा कुछ भी तो नही ये सुनकर उमर आपने बहन और उसके शौहर पर टुट पड़े मार मार कर लहु लुहान कर दिया। ईतना सब होने के बाद उसके बहन ने कहा आब आप तो जान गई हो तो चाहे हमे मार दो हमे कोई दुख नही। आपने बहन के मुह से ईतना नीडर होकर बात करते सुनकर और लहु लुहान बहन के प्यारे चेहरे को देखकर उमर के दील मे बहन के उपर प्यार आगया,उमर ने बहन से कहा किया पड़ रहे थे वह मुजे सुनाओ बहन ने कुरआन शरीफ जब पड़ना शुरु किया तो हजरत उमर मम की तरह पिगल गये।। उनको कुरआन के सत्तता का पता चल गया तो उनके ईरादे बदल गये, और वह आप (स.अ)से मिलने गार ए हीरा गये।। उमर को देख सब सहाबा परेशान हो गये के आज क्या होना है।। तब आप (स.अ) गार से मुस्कराते हुवे बाहर आये और फरमाया "उमर तुम बाज नही आओगे" और ईसि तरह हजरत उमर बिन खत्ताब ईसलाम की राह पर आगये। फिर उन्होने खुलेआम ईकरार किया ईसलाम का तब काफिरौ के पैरो तले जमिन निकल गये, के आब हम क्या करेंगे। फिर उन्होने बहुत सी आजयातिन शाही और जवानौ के सात मुकाबला किया। हिजरत ए मदीना के मौके पर आप की ललकार दुशमनौ के लिये हार साबित हुई। फिर गाजवात का दौर शुरु हुवा जिस मे आप (स.अ) के सात सय्यादीना हजरत उमर (र.अ) हुवा करते थे।।
दोस्तौ बहुत मेहनत से लिखकर आप सब की खिदमत मे हाजिर कर रहा हु। आपलोगौ को कैसा लगा कमेन्ट करके बताये जरुर।
दीनी बात दुसरौ तक पहूचाना भी सदका है, ईसलिये पड़ने के बाद शैर जरुर करदेना।।
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