आल्लाह पर भरोसा रखने वाला गुलाम की कहानी
एक गुलाम था।। वसका भरोसा सिर्फ और सिर्फ आल्लाह पर था।
एक दिन वह काम पर नही गया था। मालिक ने सोचा ईसकी तन्खोवाह बड़ा दी जाये तो वो मन लगाकर काम करेगा और काम पर आना भी बन्द नही करेगा।।
अगली बार जब उस को तन्खोवाह देने की बारी आयी तो मालिक ने उसकी तन्खोवाह बड़ाकर दे दिया। उसने पैसे लेकर कुछ नही बोला खामुशी से पैसे रख दिया।।
कुछ दिन बाद वह फिर गैर हाजिर हो गया था। मालिक को ईस बार बहुत गुस्सा आया। मालिक ने सोचा वह नौकर आब नाटक करने लगा है ताकि मै उसकी तन्खोवाह फिर से बड़ा कर दु। ईसबार उसकी चालाकी नही चलेगी। आब तो मे उसकी बड़ायी हुई तन्खोवाह भी कम कर दुंगा और उसे पेहले के माफिक तन्खोवाह दुंगा। ये सोचकर मालिक ने ईसबार तन्खोवाह देते वक्त बड़ाई हुई तन्खोवाह कम कर दिये। उसको पेहले वाली तन्खोवाह दी। गुलाम ने ईसबार भी खामुशी ईख्तयार की। आपने जुबान से कुछ ना बोला। मालिक को बड़ा ताज्जुब हुवा। मालिक ने गुलाम से कहा एक बात बता जब मैने तुम्हारी पेहली बार गैर हाजरि देखी तो मैने तुम्हारी तन्खोवाह बड़ा कर दी। तब भी तुम कुछ न बोले और आज तुम्हारी गैर हाजरी की वजह से तुम्हारे तन्खोवाह कम कर दिया तुम आब भी खामुश हो। ईसका वजह क्या है..?
गुलाम ने जवाब दिया साहाब मे पेहले बार जब गैर हाजिर हुवा था । उस दिन मेरे घर एक बच्चा हुवा था। और आपने तन्खोवाह भी बड़ाकर दिये मे समज गया था के आल्लाह ने ईसके हिस्से का रिज्क भेज दिया। और ईस बार जब मे गैर हाजिर हुआ तु जनाब मेरे वाल्दाह का ईन्तेकाल हो गया था।
आब जब आपने मुजे तन्खोवाह कम दीये तो मै ने यह मान लिया की मेरे मॉ आपने हिस्से का रिज्क ले गयी है। फिर मे ईस रिज्क के खातिर क्यो परेशान हुऊँ। जिसका जिम्मा खुद खुदा ने ले रखा हो....
दोस्तौ मुजे हिन्दि लिखने मे परेशानी होति है फिर भी आल्लाह को खोश करने के लिये लिख रहा हु और लिखता रहुंगा।।
बस आप सब दोस्तौ से गोजारिश है के मैने बहुत मुशकिल से लिखा आपलोगौ को पसन्द आये तो शैर कर देना।। और पड़कर कैसा लगा कमेन्ट करके बतायीयेगा जरुर।
Collected From Islamic Book.
Blog Writter Abdullah Ahmed.
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