पाकीजा कीरदार वाली खातुन की वाकीया।
एक बार देहली के सरजमिन पर केहेद साली का आलम पड़ा था। लोग भुख प्यास से मरने लगे थे।एक एक करके सारे जानवार भी मरने लगे थे। लोग शहर के बुजुर्ग उलमा के पास जा पहुचे। उलमा ने कहा सारे लोग कल मैदान मे जमा हु जाये, हम सब बारिश के लिये दुवा करेंगे।।
आगले सुबह फज्र के नमाज के सभी लोग ईकट्टा होने लगे,जब बड़े तादात मे लोग ईकट्टा हो गये तो बरसात बरसने के दुवा शुरु हुई। किताब गवाह है सुबह से शाम हो गये उन लोगौ ने नमाज भी वही आदा करके फिर दुवा मागंने लग गये पर मौला पानी नही बरसा रहा है।। उसी वक्त एक सवारी लेकर एक नौजवान उसी मैदान होकर जा रहा था। बड़ी तादाद ईकट्टे लोगौ को देखकर वह नौजवान उनके पास आये और पुछा यहा क्या हुवा है आपलोग क्यो ईकट्टे हुवे हो। एक बुजुर्ग ने कहा बैटा हमारे यहा कहद साली का आलम पड़ा है। मौला पानी नही बरसा रहे है। लोग भुख प्यास से मर रहे है ईसलिये दुवा करने के लीये हम सब ईकट्टा हुवे। उस नौजवान ने कहा आगर ईजाजत हो तो मै भी दुवा करु। बुजुर्ग ने कहा हा बैटा तुम भी करो किया पता मौला किसकी आमिन कबुल करले।। लिहाजा वह नौजवान आपने सवारी के पास गये और दुवा के लिये हात उटाये। किताब गवाह है उस नौजवान की हात उटाते देरी हुई पर मौला पानी बरसाने मे देर न किये।।
सारे लौग नौजवान की तरफ दौड़कर आयेऔर पुछने लगे आऐ नौजवान तुमने कौनसा वजीफा पड़कर दुवा कीये जो मौला ने तुरन्त कबुल कर लिया। वह नौजवान कहने लगे आऐ लोगो सुनो, मैने कोई वजीफा नही पड़ा,मैने कोई आयात पड़कर दुवा नही किया। "ये जो सवारी देख रहे हो सवारी मे मेरे मा है और मेरे मा की परदे का ये आलम है {मेरे मा को आज तक किसी गैर मर्द ने नही देखा, मेरे मा की परदे का ये आलम है मेरे मा आवाज कभी किसी गैर मर्द ने नही सुना} ""मे सवारी के पास आकर मेरे मा की आचल को पकड़ा और आल्लाह से आर्ज किया परबर दिगार मे उस मा की बैटा हु जिस मा की आचल कभी किसी गैर मर्द ने नही देखा। मौला मे मेरे मा के आचल का वास्ता देकर दुवा कर रहा हु पानी बरसा दे"" मेरे भाईयौ और बहनौ सोचो जिस खातुन का आचल का ये आलम है, आगर वह खातुन मौला से मांगे तु मौला शायद आसमान से चांद और सुरज को भी जमिन पर उतार देगा।।
आजकल तो फैशन के नाम पर मा बहने बेहयायी को फलौ कर रहे है।। कपड़े पहन कर भी नंगा गिख रहे है। मौला दुवा कबुल करे भी तो कैसे करे।। मुबाईल आज की जमाने मे हमारी जरुरत बन चुकी हे। लेकिन आज कल के नौजवान नस्ल बरबाद होते जा रहे है। मुबाईल एक एस एम एस सिस्टम जिसे देखकर शैतान भी शरमा जायेगा।। मुबाईल की ईस्तेमाल से तुम्हे ईसलाम माना नही करते।। पर जब भी ईस्तेमाल करो आच्चे काम के लिये करो।। आपने सहेलीयौ को शैर अ शायरी ना भेजकर नबि की एक हादिस भैज दो किया पता किसि एक सहेली ने आमल कर ली तो कल हशर के मैदान पर यही तुम्हारी बखशिश का जरिया बन सकता है।
आपने दोस्तौ के फोन पर फिजुल बाते ना करते हुवे सिर्फ जरुरत की बाते करो।।
आजकल की सबसे बड़ी मुसिबत ससियेल साईट जहा पर मा बहने किसि भी गैर मर्द को भाई,बैटा के नाम देकर दीन रात फोन पर बाते करते है। मेरे मा बहने बस ईतना याद रखना बिल्लि को शैर का नाम देने से वह शैर नही बन जाते उसी तरह ससिएल साईट पर बाते करने के लिये किसी भी गैर मर्द को भाई, बैटा बोल देने से वह भाई या बैटा नही बन जाता।
परदा करो आल्लाह के खौफ से डरो वरना कयामत के दीन तुम्हे कोई नही बचा सकेगा।।
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बहुत मेहनत से लिखता हो ईसलिये आल्लाह के वास्ते कपी ना करके शेयर करदिजियेगा।। आपकी शेयर री वजह से आगर किसि मा बहन ने पड़कर सही राह पकड़ ली तो कल कयामत के दिन मुसिबत के वक्त हो सकता ईसि एक शेयर के लिये आल्लाह बखशिश फरमा देगा।।
ये वाकिया पड़कर कैसा लगा कमेंट करके बतायीयेगा जरुर।।
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